फिजां इतनी बोझल क्यूं है..
ख़्वाब निगाहों से ओझल क्यूं है..
मौत से मिलने की तलबगार है..
ज़िन्दगी इतनी बेकल क्यूं है..
सही गलत की परख नही है..
ख़्वाहिशें इतनी चंचल क्यूं है..
चेहरे मासूमियत से भरे हैं..
दिलों मे इतना हलाहल क्यूं है..
सूकून भी सूकून नही देता..
बेचैनी से भरा हरपल क्यूं है..
अहंकार से लबालब है हर शख्स..
फिर हालात इतने निर्बल क्यूं है..
जब आखिरी अंजाम मिट्टी का मिट्टी है..
फिर हर इंसान पत्थर दिल क्यूं है
Tuesday, 22 September 2015
बीती शब ख्वाबगाह मे मेहबूब से मुलाकात हो गइ
बीती शब ख्वाबगाह मे मेहबूब से मुलाकात हो गइ
दिल ही दिल मे दिल से दिल की हरेक बात हो गई
अमावस्या के पखवाडे मे चांदनी रात हो गई
सावन के सुहाने मौसम मे महबूब से मुलाकात हो गई
मोहब्बत की मिसाल हो तो ऐसी हो
मोहब्बत की मिसाल हो तो ऐसी हो
कही ना कभी ना ,किसी ने सुनी हो
बेवफ़ा , अगर दिल तोड़ भी जाये तो
दिल से
दुआ निकले , उसको कही ज़ख्म ना हो
माना की वो मतलबी था मतलब निकाल गया
पर हमे तो वो सच्ची मोहब्बत करना सीखा गया
यु अश्क ना बहाया ना करो
यु अश्क ना बहाया ना करो
दिल के जख्म हरे हो जाते है
यु ख्वाबो मे ना आया करो
दिल के सोये अरमां मचल जाते है
तुम्हारी जिद दर्दे दिल बढाती है
जिन्दगी गम के दरिया म तब्दीले हो जाती है
अपनी आंखो मे समंदर समाये बैठे है
अपनी आंखो मे समंदर समाये बैठे है
आशिक की मोहब्बत को जिन्दगी बनाये बैठे है
गर महबूब मोहब्बत को न पा सके
जिन्दगी लुटाने का मन आपकी सौ बनाये बैठे है
मोहब्बत का जोशो जुनून सिर पे सवार नजर आता
मोहब्बत का जोशो जुनून सिर पे सवार नजर आता
हरेक संय मे महबूब का साया नजर आता
महबूब की हरेक अदा मे मोहब्बत का सैलाभ नजर आता
महबूब की मोहब्बत मे खुशियो का भंडार नजर आता
aj machal rahi hai fiza
aj machal rahi hai fiza
tera intazar hai
kal khwabgaah me machale the arama dil ke
jindagi ko gale lagane ke talabagar the
jindagi bahut khubsurat lagati hai
jis din se kiya tera didar hai
jindagi ki pahali khwaish hai tu
ab to dhadaklate dil ko
mere mahabub sirf tera intazar hai
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