Monday, 16 November 2015

चम्पा

ए चम्पा तेरी महक मेरे दिल को रास आई
तेरी कसम तेरी महक दिल मे मैने बसाइ
तेरा आँगन सूना हो जायेगा महक के बिना
फिर कोई ना आयेगा तेरे उपवन की सैर को

हमे दिली यकीं है तुझपे सनम

हमे यकी है तुझपे ना जाने क्यो
शायद मेरी मोहब्बत मे वो दम नही
ना जाने क्यो तेरी आँखो को अश्क भी स्वीकार नही
शायद तुम्हे दिल से हमसे प्यार नही
शायद तुम्हे मेरी मोहब्बत का एतबार नही
शायद मै तेरी जुल्फो मे अब तलक गिरफ्तार नही
शायद मै महबूबे मोहब्बत मे गुनाहगार नही
शायद तुमको हमसे प्यार नही
तेरी मोहब्बत पे एतबार सनम करता हू
मै दिल मे तुम रहती हो सदा
आइना ए दिल मे दीदारे यार करता हू
तेरी मोहब्बत है जिन्दगी हमारी
तेरी जुदाइ कयामत की रात है मेरे सनम
तेरी मोहब्बत की कसम जां से ज्यादा प्यार करते है हम
मोहब्बत मे दिल का रिश्ता सच्चा होता है एतबार करते है हम
तेरी मोहब्बत पे दिल से यकीं मेरे यार करता हू
तुम्हारी कसम मेरे सनम तेरी मोहब्बत की चाहत मे जीता हू मरता हू
दिल से इबादत मेरी सरकार करता हू
जितनी मोहब्बत चँदा को चाँदनी से है उससे भी ज्यादा तुमसे प्यार करता हू
जितनी मोहब्बत चकवा को चकवी से है उससे भी ज्यादा मोहब्बत तुमसे करता हू

Tuesday, 22 September 2015

फिजां इतनी बोझल क्यूं है..

फिजां इतनी बोझल क्यूं है.. ख़्वाब निगाहों से ओझल क्यूं है.. मौत से मिलने की तलबगार है.. ज़िन्दगी इतनी बेकल क्यूं है.. सही गलत की परख नही है.. ख़्वाहिशें इतनी चंचल क्यूं है.. चेहरे मासूमियत से भरे हैं.. दिलों मे इतना हलाहल क्यूं है.. सूकून भी सूकून नही देता.. बेचैनी से भरा हरपल क्यूं है.. अहंकार से लबालब है हर शख्स.. फिर हालात इतने निर्बल क्यूं है.. जब आखिरी अंजाम मिट्टी का मिट्टी है.. फिर हर इंसान पत्थर दिल क्यूं है