ए चम्पा तेरी महक मेरे दिल को रास आई
तेरी कसम तेरी महक दिल मे मैने बसाइ
तेरा आँगन सूना हो जायेगा महक के बिना
फिर कोई ना आयेगा तेरे उपवन की सैर को
Monday, 16 November 2015
चम्पा
हमे दिली यकीं है तुझपे सनम
हमे यकी है तुझपे ना जाने क्यो
शायद मेरी मोहब्बत मे वो दम नही
ना जाने क्यो तेरी आँखो को अश्क भी स्वीकार नही
शायद तुम्हे दिल से हमसे प्यार नही
शायद तुम्हे मेरी मोहब्बत का एतबार नही
शायद मै तेरी जुल्फो मे अब तलक गिरफ्तार नही
शायद मै महबूबे मोहब्बत मे गुनाहगार नही
शायद तुमको हमसे प्यार नही
तेरी मोहब्बत पे एतबार सनम करता हू
मै दिल मे तुम रहती हो सदा
आइना ए दिल मे दीदारे यार करता हू
तेरी मोहब्बत है जिन्दगी हमारी
तेरी जुदाइ कयामत की रात है मेरे सनम
तेरी मोहब्बत की कसम जां से ज्यादा प्यार करते है हम
मोहब्बत मे दिल का रिश्ता सच्चा होता है एतबार करते है हम
तेरी मोहब्बत पे दिल से यकीं मेरे यार करता हू
तुम्हारी कसम मेरे सनम तेरी मोहब्बत की चाहत मे जीता हू मरता हू
दिल से इबादत मेरी सरकार करता हू
जितनी मोहब्बत चँदा को चाँदनी से है उससे भी ज्यादा तुमसे प्यार करता हू
जितनी मोहब्बत चकवा को चकवी से है उससे भी ज्यादा मोहब्बत तुमसे करता हू