जर्रे जर्रे मे मेरी मोहब्बत का नूर है समाया लहू के कतरे कतरे से महबूब का नाम आया कायनात की हरेक शंय मे दीदारे यार किया अपनी जान से भी ज्यादा मैने प्यार किया है
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