आज दीपोत्सव पे रौशन सारा जहां है
जमी तो जमी यारो रौशनी से रौशन आसमां है
महर बरसेगी आज लक्छमी की पूरे होंगे दिली अरमान
खुशियो की ख्वाहिश करो पाओगे खुशिया अपार
लक्छमी खुद चलकर आज आयेगी मेरे महबूब तेरे द्वार
खुशियो की हरेक आज बधाई देगा
अमावस्या को भी मुकददर से चाँद दिखाइ देगा
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