रोज खाब मे चाँदनी दीदार करता हू
रोज अपनी ख्वाबगाह मे इन्तजार करता हू
ख्वाहिशे दिल मे तमाम लियो
उम्मीदो का कारवां बदस्तूर जवाँ
चाँदनी से पहले महक आती है ख्वाब मे
जैसे जनन्त की हूर कोई चाँदनी रात मे
मरमरी जिस्म की मलिका महबूबे मोहब्बत चाँदनी
दीदारे यार से जवां होती है धडकने दिल को
दिल उछलकर बाहर आने को बेकरार
बेचेन उमंगो का महबूब को सजदा बार बार
दिल को करार आता है चाँदनी तेरे दीदार से
जैसे कारवां ने पाई ठौर आज की
तेरे नूर से रौशन है ये जहां
ये धरती ये आसमां
क्या तुम्ही मेरी मंजिल मेरा मुकाम हो
क्या तुम्ही मेरी जिन्दगी की पहली सुब आखिरी शाम हो
क्या तुम्ही मेरी मोहब्बत
जिन्दगी का पहला जाम हो
चाँदनी है जिन्दगी की शाम
भोर जिन्दगी की चाँदनी
आगाज चाँदनी है और अंजाम चाँदनी
Monday, 16 November 2015
दीदारे यार
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