अमावस्या की स्याह रात चाँदनी का दीदार जैसे पतझड के मौसम मे बसंतो बहार जैसे चाँद से बरसती मादक हाला बेशुमार जैसे सुबहो की पहली किरण जैसे रति धरा पे आई कर सोलह सिन्गार लबो से टप टप टपकती हुई अमृत की धार चाँदनी धरा पे कर शबनमी सिन्गार
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